What is NEFT? National Electronics Fund Transfer Charges, Timings, Procedure

The full form of NEFT is National Electronic Funds Transfer. The NEFT service is launched on November 2005 by the Reserve Bank of India (RBI). Through this bank holders can transfer the funds through online mode between banks throughout India. Today, NEFT has become the one of the demanding methods of transferring funds. Today we will discuss the NEFT in detail, we have provided the Charges, Timings, Procedure and other important information on this page. Let’s discuss them.

NEFT- Benefits

  • National Electronic Funds Transfer (NEFT) is the secure platform 
  • It is the easy and fastest way of transferring the funds.
  • Time saving process, person can transfer the fund anytime anywhere.
  • No need of physical documents like cheque or demand draft one can check all the transaction digitally.
  • Quick and easy funds transfer online. Anyone can do NEFT within few minutes with less or nil formality. 
  • You will get the receipt on your mail only.
  • Hand to hand transactions provide assurance to both sender and reciever.

NEFT Timings

NEFT services is now available 24×7 stated by all banks from December 16. Now customer can transfer the funds 365 days through NEFT. The government have given the suggestion to make the service available 24*7 from December 2019. 

Limit For NEFT Transactions

There is no minimum limit to perform the transaction, person can transfer Rs. 1 also. There is no maximum limit too. But person can only transfer Rs.50,000 per transaction.

NEFT Transfer Charges 

There are no charges for the Inward transactions whereas person have to pay the charges for the Outward transactions. Here is the list of the charges.

Transaction AmountNEFT Charges
Amounts up to Rs 10,000Rs 2.50 + Applicable GST
Amounts above Rs 10,000 and up to Rs 1 lakhRs 5 + Applicable GST
Amounts above Rs 1 lakh and up to Rs 2 lakhRs 15 + Applicable GST
Amounts above Rs 2 lakh and up to Rs 5 lakhRs 25 + Applicable GST
Amounts above Rs 5 lakh and up to Rs 10 lakhRs 25 + Applicable GST

Process To Transfer Money through NEFT

  • First of all, you have to login to your net banking account with your login account 
  • After successful login you have to select the ‘Fund Transfer’ option.
  • Now you have to choose the beneficiary from the list if you want to add new beneficiary then you have to press the ‘Add Beneficiary’ button.
  • Thereafter enter the bank details of the beneficiary that is account number, name, IFSC, bank branch, and type of account.
  • Recheck the details.
  • Select the account from which you transfer the account. 
  • Now from the next step you have to enter the appropriate amount you want to transfer. 
  • At last, hit on the submit button and your transaction ahs been completed. 

संविधान की परिभाषा क्या है | संविधान की मुख्य विशेषताएं

किसी भी देश का संविधान उस देश की राजनीति व्यवस्था, न्याय व्यवस्था तथा नागरिकों के हितों की रक्षा करने का एक मूल माध्यम होता है| जिसके माध्यम से उस देश के विकास की दिशा का निर्धारण होता है| संविधान, किसी भी देश का मौलिक कानून है, जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है। इसके साथ ही यह सरकार और देश के नागरिकों के बीच संबंध भी स्थापित करता है। भारत का संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को आंशिक रूप से लागू किया  गया और 26 जनवरी 1950 को इसे पूर्ण रूप से पूरे देश में लागू कर दिया गया था| http://economynewswire.com/

संविधान की परिभाषा

किसी देश या संस्था द्वारा निर्धारित किए गए वह नियम जिसके माध्यम से उद्देश्य संस्था का सुचारु ढंग से संचालन हो सके उसे देश या संस्था का संविधान कहा जाता है| भारत का संविधान सभा द्वारा 26 जनवरी 1950 को आंशिक रूप से संपूर्ण देश में लागू कर दिया गया था| संविधान दो प्रकार के होते हैं, एक लिखित संविधान और दूसरा अलिखित| विश्व का प्रथम लिखित संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका का है, और संसार का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत का है| वर्तमान में, भारत का संविधान 465 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचियों में लिखित है| जिस समय संविधान लागू हुआ था, उस समय 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचि और 22 भाग थे। संविधान में समय– समय पर कई संशोधन किए जाते हैं|

लिखित संविधान क्या होता है

लिखित संविधान वह होता है, जिसका अधिकांश भाग लिखित होता है। लिखित संविधान किसी देश को अच्छी तरह से संचालित करनें के लिए बनाया गया लिखित दस्तावेज होता है| लिखित संविधान का निर्माण किसी विशेष समय पर संविधान सभा द्वारा किया जाता है। लिखित संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है, इसका उल्लंघन करनें वाले को गैर संवैधानिक माना जाता है। संविधान के नियमों के आधार पर सम्पूर्ण देश में शासन किया जाता है|

अलिखित संविधान क्या है

अलिखित संविधान का आशय (meaning of constitution) ऐसे संविधान से है, जिसे लेखबद्ध ना किया गया हो अर्थात वह संविधान लिखित रूप से मौजूद ना हो। अलिखित संविधान के कुछ भाग लिखित रूप से मौजूद होते हैं परंतु सभी भाग नहीं। मुख्यतः संविधान लिखित रूप में ही मौजूद होते हैं। ब्रिटेन ही एक ऐसा देश है, जिसका संविधान अलिखित है और उस संविधान के केवल कुछ ही भाग लिखित रूप से मौजूद हैं। ब्रिटिश का संविधान अलिखित होने का कारण यहाँ का संविधान का निरंतर बदलता रहता है।

भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएं

प्रत्येक देश के संविधान की अपनी विशेषताएं होती है, जिनकी सहायता से उस देश की सम्पूर्ण व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। यही बात भारत के संविधान के बारे में कही जा सकती है| भारतीय संविधान का निर्माण एक विशेष संविधान सभा के द्वारा किया गया है, और इस संविधान की अधिकांश बातें लिखित रूप में है। इस दृष्टिकोण से भारतीय संविधान, अमेरिकी संविधान के समतुल्य है। भारत का संविधान लिखनें में 2 वर्ष 11 महीनें 18 दिन का समय लगा था| भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, और इसकी अनेक विशेषताएं है, जिसके कारण यह अन्य देशों से भिन्न है| संविधान की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है-

1.सबसे बड़ा लिखित संविधान

भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है| वर्तमान में इस संविधान में कुल 450 अनुच्छेद (24 भागों में विभक्त) तथा 12 अनुसूचियां, एक प्रस्तावना तथा 5 परिशिष्ट हैं| भारतीय संविधान में कुल 177369 शब्द शामिल हैं| भारतीय संविधान की विशालता का मुख्य कारण उसका विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र (लगभग 32,87,263 वर्ग किलोमीटर), केंद्र तथा राज्यों के लिए एक ही संविधान जातिगत एवं भाषागत विशेषताएं (लगभग 2000 जातियां एवं 45,000 उपजातियां तथा 1652 भाषाएं) तथा संविधान सभा में वकीलों की अधिक संख्या एवं प्रभाव का होना है|

2.संविधान में लचीलेपन और कठोरता का समावेश  

भारतीय संविधान लचीलेपन और कठोरता का समावेश है, यह अमेरिका, फ्रांस, जापान और स्विट्जरलैंड की तरह ना तो बहुत कठोर है और ना ही ब्रिटेन व इजरायल की तरह बहुत लचीला है| भारतीय संविधान लचीलेपन और कठोरता का विचित्र मिश्रण है| भारत के संविधान में राष्ट्रपति का चुनाव (अनुच्छेद 54 और 55) संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति (अनुच्छेद 73 और 162) तथा संविधान संशोधन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) अनम्यता के गुण को प्रदर्शित करते हैं, वही नए राज्यों का निर्माण तथा उसकी सीमाओं में परिवर्तन तथा नागरिकता जैसे प्रावधानों का संशोधन, जो साधारण बहुमत के द्वारा हो जाते हैं| अमेरिका के संविधान में पिछले 225 वर्ष में मात्र 27 संशोधन तथा ऑस्ट्रेलिया के संविधान में 110 वर्षो में 8 संशोधन किए गए हैं वहीं भारत के संविधान में 2017 तक 122 संविधान संशोधन हो चुके हैं|

3.विभिन्न स्रोतों से निर्मित संविधान

भारतीय संविधान के निर्माण में देश और विदेशी स्त्रोत लिए गया हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है| भारतीय संविधान के निर्माण में लगभग 250 अनुच्छेदों को भारत सरकार अधिनियम 1935 से लिया गया है| इसके अतिरिक्त 60 विश्व के संविधान के प्रावधानों को भी इसमें शामिल किया गया है|

4.धर्मनिरपेक्ष देश– धर्मनिरपेक्ष देश शब्द का अर्थ यह है, कि भारत में मौजूद सभी धर्मों को देश में एक समान संरक्षण और समर्थन मिलेगा। इसके अतिरिक्त सरकार सभी धर्मों के साथ एक जैसा व्यवहार करेगी और उन्हें एक समान अवसर उपलब्ध कराएगी।

5.सरकार का संसदीय स्वरूप

संविधान के अनुसार भारत में सरकार का संसदीय स्वरूप है। भारत में दो सदनों लोकसभा और राज्य सभा, वाली विधायिका है। सरकार के संसदीय स्वरूप में, विधायी और कार्यकारिणी अंगों की शक्तियों में कोई स्पष्ट अंतर नहीं है। भारत में सरकार का मुखिया प्रधानमंत्री होता है।

6.एकल नागरिकता

ब्रिटेन, फ्रांस, चीन आदि देशों की तरह भारतीय संविधान में भारतीयों के लिए एकल नागरिकता का प्रावधान करता है| विश्व के  लगभग 90 देशों में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है, जिसमें व्यक्ति एक ही साथ दो देशों की नागरिकता रख सकता है| दिसंबर 2005 से अप्रवासी भारतीयों तथा भारतीय मूल के व्यक्तियों को दी जानेवाली समुंद्र पारी नागरिकता किसी भी प्रकार से दोहरी नागरिकता नहीं है, क्योंकि समुंद्र पारी नागरिकता प्राप्त व्यक्ति को भारत में किसी भी प्रकार का राजनीतिक तथा सार्वजनिक पदों को प्राप्त करने का अधिकार प्रदान नहीं किया गया है|

7.एकीकृत और स्वतंत्र न्यापालिका

भारत का संविधान एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका प्रणाली प्रदान करता है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट है। इसे भारत के सभी न्यायालयों पर अधिकार प्राप्त है। इसके बाद उच्च न्यायालय, जिला अदालत और निचली अदालत का स्थान है। किसी भी प्रकार के प्रभाव से न्यायपालिका की रक्षा के लिए संविधान में कुछ प्रावधान बनाए गए हैं|

8.मौलिक कर्तव्य

मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) के अंतर्गत संविधान में शामिल किया गया है। इसके लिए एक नया भाग IV– ए बनाया गया और अनुच्छेद 51– ए के अंतर्गत दस कर्तव्य शामिल किए गए। यह प्रावधान नागरिकों यह बात बताता है, कि अधिकारों का उपयोग करने के दौरान उन्हें अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए।

9.आपातकाल के प्रावधान

देश में किसी भी असाधारण स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति को कुछ खास कदम उठाने के अधिकार दिए गये है। आपातकाल लगा दिए जाने के बाद राज्य पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन हो जाते हैं। आवश्यकता के अनुसार आपातकाल देश के कुछ राज्यों या पूरे देश में लगाया जा सकता है।

10.सार्वभौम व्यस्क मताधिकार  

भारत में निवास करनें वाले 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को जाति, धर्म, वंश, लिंग, साक्षरता आदि के आधार पर बिना भेदभाव किए मतदान करनें का अधिकार प्राप्त है। सार्वभौम व्यस्क मताधिकार सामाजिक असमानताओं को दूर करता है और सभी नागरिकों के लिए राजनीतिक समानता के सिद्धांत को बनाए रखता है।